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सावरे बिन तुम्हारे गुजारा नहीं
तेरे सिवा कोई हमारा नहीं

सावरे बिन तुम्हारे गुजारा नहीं
तेरे सिवा कोई हमारा नहीं

जब से देखा सावरे, जलवा तुम्हारा, दिल तुझ पे है वारा, तेरे हो लिए
तुमने भी सावरे, मेरी राहों से, चुन चुन कर के कांटे फूल बो दिए
तेरी यह जुदाई गवारा नहीं,
सावरे बिन तुम्हारे गुजारा नहीं...

जब जब मैं सावरे, दर तेरे आया, बिन मांगे सब पाया, झोली भर गयी
इतना मिला मुझे, जितने के लायक, मैं नहीं था ए मालिक, आँख भर गयी
कैसे मैं कह दूँ तू हमारा नहीं
सावरे बिन तुम्हारे गुजारा नहीं...

मिले मुझ को सांवरे, सेवा तुम्हारी, यह अरज हमारी, ठुकराना ना
कहता है ‘रोमी’, अपनी नज़र से, इक पल के लिए भी घिरना ना
इक पल भी तुझ को विसारा नहीं



saawre bin tumhare gujara nahi tere siva koi hamara nahi



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हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
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राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
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राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे
किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है