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कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।

कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।

वृन्दावन का एक ग्वाला,
मन मोहन मेरा मुरली वाला ।
मैंने जाना उसके पास रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ...

वृन्दावन में कृष्ण कन्हैया,
बलदाऊ के छोटे भैया ।
मेरी डोरी उनके हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ...

वृन्दावन मेरो धाम रंगीला,
बरसाना मेरा बड़ा ही रसीला ।
मेरी जाग गए हैं भाग्य रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ...

वृन्दावन में बांके बिहारी
बांके बिहारी जय हो तिहारी
मेरा जनम जनम का साथ रे



koi pakad ke mera hath re mohe vrindavan pahuncha deo



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तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,