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राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता पत्ता श्याम बोलदा ।
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता पत्ता

राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता पत्ता श्याम बोलदा ।
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता पत्ता श्याम बोलता ॥

कली कली मैं महक उसी की,
हर पक्षी मैं चहक उसी की ।
नाचे मोरे कोकें, कोयलिया कारी,
के पत्ता पत्ता श्याम बोलदा ॥

राधा नाम का खिल गया उपवन,
महक उठा सारा वृन्दावन ।
गूंजे गली गली में शोर भारी,
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता ॥

प्रेम के जल से सिंची ये बगिया,
महके ग्वाले महकीं सखिया
सब रसिकन को लागी हैं प्यारी,
के पत्ता पत्ता श्याम बोलदा ॥

‘चित्र विचित्र’ छाई हरियाली,
फिरत राधा संग बनवारी
ऐसी पागल की बगिया है न्यारी



radha naam ki lagayi phulvari ke patta patta shyam bolta



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नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
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मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
बांके बिहारी की देख छटा,
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बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया,
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फिर डरने की क्या बात है
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
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लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
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बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
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हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
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बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
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श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
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हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
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पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
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श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
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ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे
किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे