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सरस किशोरी, वयस कि थोरी, रति सर बोरी,
कीजै कृपा की कोर।

सरस किशोरी, वयस कि थोरी, रति सर बोरी,
कीजै कृपा की कोर।

साधन हीन, दीन मैं राधे, तुम करुणामई प्रेम-अगाधे,
काके द्वारे, जाय पुकारे, कौन निहारे, दीन दुखी की ओर।

करत अघन नहिं नेकु उघाऊँ, भरत उदर ज्यों शूकर धावूँ,
करी बरजोरी, लखि निज ओरी, तुम बिनु मोरी, कौन सुधारे दोर।

भलो बुरो जैसो हूँ तिहारो, तुम बिनु कोउ न हितु हमारो,
भानुदुलारी, सुधि लो हमारी, शरण तिहारी, हौं पतितन सिरमोर।

गोपी-प्रेम की भिक्षा दीजै, कैसेहुँ मोहिं अपनी करी लीजै,
तव गुण गावत, दिवस बितावत, दृग झरि लावत, ह्वैहैं प्रेम-विभोर।

पाय तिहारो प्रेम किशोरी!, छके प्रेमरस ब्रज की खोरी,



saras kishori vayas ki thori rati ras bori pad by jagatguru kripalu ji maharaj



Bhajan Lyrics View All

जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
दीवानी बन जाउंगी मस्तानी बन जाउंगी,
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है