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मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे नाम
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल काली ।

मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे नाम
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल काली ।

प्रात होत हम श्री यमूनाजी जाएँगे,
करके पान हम जीवन सफल बनाएँगे ।
होवे सब तो पूरण काम, रटेंगे राधे राधे नाम ॥१॥

श्री गोवर्धन रूप के दर्शन पाएँगे,
परिक्रमा के जीवन सफल बनाएँगे ।
करे मानसी गंगा स्नान, रटेंगे राधे राधे नाम ॥२॥

श्री बरसाने धाम की महिमा न्यारी है,
महलोकी की सरकार श्री राधा रानी है ।
डफ़ ढोल की दे दे ताल, रटेंगे राधे राधे नाम ॥३॥

दूर दूर से नर और नारी यहा आते है,
दर्शन करके जीवन सफल बनाते है ।
मिले जीवन मे विश्राम, रटेंगे राधे राधे नाम ॥४॥



man chal vrindavan dhaam ratenge radhe radhe naam milenge kunj bihari od ke kaambal kari



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ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
दीवानी बन जाउंगी मस्तानी बन जाउंगी,
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा