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Narração em português do Bhagavad Gita

01 O Bhagavad Gita - A Batalha

02 O Bhagavad Gita - Lamentação e rendição de Arjuna

03 O Bhagavad Gita - Trabalhando em liberdade completa

04 O Bhagavad Gita - Disciplinando as ações mentais

05 O Bhagavad Gita - Percebendo a presença do senhor

06 O Bhagavad Gita - A maravilhosa forma cósmica

07 O Bhagavad Gita - Os olhos do conhecimento

08 O Bhagavad Gita - A natureza divina e demoníaca

09 O Bhagavad Gita - Pronto para lutar

10 O Bhagavad Gita - O nosso melhor amigo

Contents of this list:

01 O Bhagavad Gita - A Batalha
02 O Bhagavad Gita - Lamentação e rendição de Arjuna
03 O Bhagavad Gita - Trabalhando em liberdade completa
04 O Bhagavad Gita - Disciplinando as ações mentais
05 O Bhagavad Gita - Percebendo a presença do senhor
06 O Bhagavad Gita - A maravilhosa forma cósmica
07 O Bhagavad Gita - Os olhos do conhecimento
08 O Bhagavad Gita - A natureza divina e demoníaca
09 O Bhagavad Gita - Pronto para lutar
10 O Bhagavad Gita - O nosso melhor amigo

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बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
दीवानी बन जाउंगी मस्तानी बन जाउंगी,
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही