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कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥

कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥

तू जिसे चाहे ऐसी नहीं मैं,
हां तेरी राधा जैसी नहीं मैं ।
फिर भी हूँ कैसी, कैसी नहीं मैं,
कृष्णा मोहे देख तो ले अक बार ॥

बूँद ही बूँद मैं प्यार की चुन कर,
प्यासी रही पर लायी हूँ गिरिधर ।
टूट ही जाए आस की गागर,
मोहना ऐसी कांकरिया नहीं मार ॥

माटी करो या स्वरण बना लो,
तन को मेरे, चरणों से लगालो ।
मुरली समझ हाथों में उठा लो,



kahna aan padi main tere dvar krishna bhajan



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मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।