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मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये

मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
मुरलीवाला नज़र आये मेरा प्यारा नाज़र आये

गैरो ने ठुकराया अपने भी बदल गये है
हम साथ चले जिनके वो दूर निकल गये है
तेरे ही करम पर हूँ , तू बकश या ठुकराये
मुँह फेर जिधर......

माना के मैं पापी हूँ मुझे खबर गुनायो की
बस इतनी सजा देना मुझे मेरे गुनायो की
तेरे दर हो सर मेरा , और साँस में तू आये
मुँह फेर जिधर.....

हम ख़ाख़ नशीनो की क्या खूब तमना है
तेरे नाम पे जीना है तेरे नाम पे मरना है
मरना है तो तेरी , चोखट पे ही मर जाये
मुँह फेर जिधर.....

बोल बांके बिहारी लाल की जय
जय जय श्री राधे



muh fer jidhar dekhu mujhe tu hi najar aaye hum chidke dar tera ab aur kidhar jaye



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तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार