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बूहे भावें मन्दिराँ दे खोल या ना खोल,
अस्सी कुण्डा खड़कायी जाना ए ।

बूहे भावें मन्दिराँ दे खोल या ना खोल,
अस्सी कुण्डा खड़कायी जाना ए ।
मर्जी ए तेरी चाहे बोल या न बोल,
ऐसी माँ माँ कह के बुलाई जाना ए ॥

बच्चेयाँ दी भूलां उत्ते मावां पौन पर्दा,
भूल हो ही जांदी ए, कोई जान के नहीं करदा ।
लख्ख फटकार भावें गुस्से विच्च बोल,
ऐसी हसके तैनू वी मनाई जाना ए ॥

चाहे दुत्कार चाहे ठोकरा वी मार माँ,
ऐसी वी हां टीठ पक्के छडांगे ना द्वार माँ ।
सुख विच रख भावें दुख विच्च रोल,
अस्सी सर अपना ही झुकाई जाना ए ॥

बच्चियां दे बाजो तैनू माँ किसे कहना नहीं,
बच्चियां नाल रूस के माँ चैन तैनू पैना नहीं ।
कदी खुश होके जे बुलावेंगी माँ कोल,
हस हस के तैनू वी हसाई जाना ए ॥

तेर ते ही हक्क साडा तेरे ते ही ज़ोर माँ,
तेरे बिना गल्ल साडी सुने कौन होर माँ ।
सुन या न सुन लेना सुख दुःख फ़ोल,



buhe bhave mandira de khol ya na khol asi kunda khadkayi jana e



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मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
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कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
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श्याम देखा घनश्याम देखा
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तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
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अपनी वाणी में अमृत घोल
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बालम बोलो कब आओगे॥