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श्यामा रोज ना बजाय करो बंसरी
वे घरो साणु मार पैंदी ए, सुन मोहिना

श्यामा रोज ना बजाय करो बंसरी
वे घरो साणु मार पैंदी ए, सुन मोहिना

तेरी बांसुरी नू लै जान चोर वे,
के जिवें साडा दिल लुटिया, सुन मोहना ।

श्यामा रोज ना लिखा करो चिठ्ठियां,
के वृन्दावन आन मिलेंगे, वे श्यामा ।

पानी भरण दे बहाने आवां,
तेरा मेरा इक रास्ता, सुन मोहिना ।

श्यामा फागुन महीना आया,



shyama roj na bajaya karo bansuri gharo sanu maar paindi a sun mohna



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सादर भारत शीश धरी लीन्ही
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
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ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
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ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
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बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
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एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
तुम रूठे रहो मोहन,
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मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।