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प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए
प्रेमियों ने जो बनाया बन गए

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए
प्रेमियों ने जो बनाया बन गए
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

जान मीरा की ना राणा ले सका
ज़हर भेजे थे तो अमृत बन गए
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए
प्रेमियों ने जो बनाया बन गए  

भाट नरसिंह भक्त का तुमने भरा
वृंदावन के सेठ श्यामल बन गए
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए
प्रेमियों ने जो बनाया बन गए
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

प्रेम से परिपूर्ण जिसने दिल दिया
बिक गए बिन दाम चाकर  बन गए
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए
प्रेमियों ने जो बनाया बन गए
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

भाव तुलसीदास का पूरा किया
मुरली छोड़ के धनुषधारी बन गए
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए
प्रेमियों ने जो बनाया बन गए



prem ke bandhan me mohan bandh gaye premio ne jo banaya ban gaye



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मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
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श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
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गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
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जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
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