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हम दुनिया लुटाये बैठे है,
क्या जाने कोई दर्द है दिल,

हम दुनिया लुटाये बैठे है,
क्या जाने कोई दर्द है दिल,

खामोश है लोक लेकिन दिल में तूफ़ान छिपाए बेठे है,
उनको क्या मेरी वफाओ से वे तो लगदे है बेगाने,
लेकिन हम उनकी उल्फत में कसमे खाए बेठे है,
ये इश्क बाफना चीज है क्या जो हुसन से हारे बेठे है,
कुछ भी हो उनके सजदे में,हम सेर को जुकाए बेठे है,
क्या जाने जाना ज़माने से दर कर वो दिन में  मिलने न आये हो,
मिलने को इसलिए रातो की हम नींदे उडाये बेठे है,
एक तमना आ जाओ मन मोहन प्यारे आ जाओ,
बर्दास्त नही अब तन्हाई हम रही बन ने को हम तो,
हम बाहे फहलाये बेठे है,



hum duniya lutiye bethe hai



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बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा
मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया