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जय नंदनँदन सुखधाम हरे,
गोपी जन वल्लभ श्याम हरे ।

जय नंदनँदन सुखधाम हरे,
गोपी जन वल्लभ श्याम हरे ।

जय जीवन धन ब्रजबाम हरे,
विहरत वृन्दावन धाम हरे ।

जय ललितादिक ब्रजबाम हरे,
सँग मनसुख अरु श्रीदाम हरे ।

जय कोटि काम अभिराम हरे,
रस बरसावत ब्रजधाम हरे ।

जय नंद यशोमती बाम हरे,



jai nandnandan sukhdhaam hare gopi jan vallabh shyam hare



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कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा