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Jassa Patti vs Bhupinder Machiwara

Nandgaon, Sirohi (29 October 2014) | Gargsahinta Katha | Shri Rajendra Das Ji Maharaj

Brahmanwala : Jassa Patti vs Satender Mokhriya

LIVE - Gobhagwat Katha by Rajendra Das Ji - 10 April 2016 || Day 3

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Jassa Patti vs Bhupinder Machiwara
Nandgaon, Sirohi (29 October 2014) | Gargsahinta Katha | Shri Rajendra Das Ji Maharaj
Brahmanwala : Jassa Patti vs Satender Mokhriya
LIVE - Gobhagwat Katha by Rajendra Das Ji - 10 April 2016 || Day 3

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मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
सारी दुनियां है दीवानी, राधा रानी आप
कौन है, जिस पर नहीं है, मेहरबानी आप की
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे
किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,