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रंग मत डाले रे साँवरिया, म्हाने गुजर मारे रे,
रंग मत डाले रे...

रंग मत डाले रे साँवरिया, म्हाने गुजर मारे रे,
रंग मत डाले रे...

सांस बुरी छे म्हारी ननद हठीली
हो परणायो बईमान बालम पीछे पगड़े रंग मत डाले रे
हो हो रंग मत डाले रे साँवरिया...

जुलम कर डाल्यों सितम कर डाल्यों...
काले ने...काले ने...काले ने कर दियो लाल, जुलम कर डाल्यों

कोई डाले नीलो पीलो, कोई डाले हरो गुलाबी
कान्हा ने...कान्हा ने...कान्हा ने डाल्यों लाल, जुलम कर डाल्यों


होली खेलांगा आपा गिरधर गोपाल से...
तुम झोली भरलो रे भक्तो, रंग और गुलाल से

हो लाएंगे वो संग अपनी ग्वाल पाल की टोली
में भी रंग अबीर मलूंगी, और माथे पर रोली
बच बचके रहना उनकी टेडी मेडी चाल से
होली खेलांगा आपा गिरधर गोपाल से...

श्याम पिया की बजे बाँसुरिया, और ग्वालो के मजीरे
शंख बजाये ललिता नाचे राधा धीरे धीरे....!!
गाएंगे फाग मिलके हम भी सुर ताल से...



rang mat daro re sanwariya maro gujar mare re holi khelenge aapa giridhar gopal se



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एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
दीवानी बन जाउंगी मस्तानी बन जाउंगी,
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,