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Shrimad Bhagwat Katha by Sadhvi Chitralekha Deviji

Sadhvi Chitralekha Deviji Day 1 of 7 Shrimad Bhagwat Katha

Sadhvi Chitralekha Deviji Day 2 of 7 Shrimad Bhagwat Katha

Sadhvi Chitralekha Deviji Day 3 of 7 Shrimad Bhagwat Katha

Sadhvi Chitralekha Deviji - Day 4 of 7 Shrimad Bhagwat Katha

Sadhvi Chitralekha Deviji - Day 5 of 7 Shrimad Bhagwat Katha

Sadhvi Chitralekha Deviji - Day 6 of 7 Shrimad Bhagwat Katha

Sadhvi Chitralekha Deviji - Day 7 of 7 Shrimad Bhagwat Katha

sadhvi saraswati ji bhagwat katha in gondiya part(1/1)

sadhvi saraswati ji bhagwat katha gondiya part 3

Contents of this list:

Sadhvi Chitralekha Deviji Day 1 of 7 Shrimad Bhagwat Katha
Sadhvi Chitralekha Deviji Day 2 of 7 Shrimad Bhagwat Katha
Sadhvi Chitralekha Deviji Day 3 of 7 Shrimad Bhagwat Katha
Sadhvi Chitralekha Deviji - Day 4 of 7 Shrimad Bhagwat Katha
Sadhvi Chitralekha Deviji - Day 5 of 7 Shrimad Bhagwat Katha
Sadhvi Chitralekha Deviji - Day 6 of 7 Shrimad Bhagwat Katha
Sadhvi Chitralekha Deviji - Day 7 of 7 Shrimad Bhagwat Katha
sadhvi saraswati ji bhagwat katha in gondiya part(1/1)
sadhvi saraswati ji bhagwat katha in gondiya part (1/2)
sadhvi saraswati ji bhagwat katha gondiya part 3

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यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला