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Pravachan By Shri Rajeshwarnand Ji Maharajin August 2011 at Prempuri Ashram, Mumbai

Pravachan - Shri Rajeshwarnand Ji Maharaj - Day 1 (Prempuri Ashram, Mumbai)

Pravachan - Shri Rajeshwarnand Ji Maharaj - Day 2 (Prempuri Ashram, Mumbai)

Pravachan - Shri Rajeshwarnand Ji Maharaj - Day 3 (Prempuri Ashram, Mumbai)

Pravachan - Shri Rajeshwarnand Ji Maharaj - Day 4 (Prempuri Ashram, Mumbai)

Pravachan - Shri Rajeshwarnand Ji Maharaj - Day 5 (Prempuri Ashram, Mumbai)

Pravachan - Shri Rajeshwarnand Ji Maharaj - Day 6 (Prempuri Ashram, Mumbai)

Pravachan - Shri Rajeshwarnand Ji Maharaj - Day 7 (Prempuri Ashram, Mumbai)

Pravachan - Shri Rajeshwarnand Ji Maharaj - Day 8 (Prempuri Ashram, Mumbai)

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राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का