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गुरु बिन कौन बतावे बाट
बड़ा विकिट यम घाट

गुरु बिन कौन बतावे बाट
बड़ा विकिट यम घाट

भ्रान्ति की पहाड़ी, नदिया बीच में
अहंकार की लाट ।
बड़ा विकिट यम घाट...

काम क्रोध दो पर्वत ठाड़े,
लोभ चोर संघात ।
बड़ा विकिट यम घाट...

मद मक्षर का मेधा बरसत
माया पवन बह जाए
बड़ा विकिट यम घाट...

कहत कबीर सुनो भाई साधो,
क्यों तरना यह घाट



guru bin kaun batave baat bada vikit yam ghaat



Bhajan Lyrics View All

मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा
मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे