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Bhagavad Gita Chapter 13 Verse 9

भगवद् गीता अध्याय 13 श्लोक 9

इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहङ्कार एव च।
जन्ममृत्युजराव्याधिदुःखदोषानुदर्शनम्।।13.9।।

हिंदी अनुवाद - स्वामी रामसुख दास जी ( भगवद् गीता 13.9)

।।13.9।।इन्द्रियोंके विषयोंमें वैराग्यका होना? अहंकारका भी न होना और जन्म? मृत्यु? वृद्धावस्था तथा व्याधियोंमें दुःखरूप दोषोंको बारबार देखना।

हिंदी अनुवाद - स्वामी तेजोमयानंद

।।13.9।। इन्द्रियों के विषय के प्रति वैराग्य? अहंकार का अभाव? जन्म? मृत्यु? वृद्धवस्था? व्याधि और दुख में दोष दर्शन৷৷.।।