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Shri Hit Vrindavan Bhav Utsav ( Van Viharotsav ) By by Shree Hita Ambrish ji at Hisar in November 2013

Shri Hit Vrindavan Bhav Utsav ( Van Viharotsav ) Part 1 By Shree Hita Ambrish ji

Shri Hit Vrindavan Bhav Utsav ( Van Viharotsav ) Part 2 By Shree Hita Ambrish ji

Shri Hit Vrindavan Bhav Utsav ( Van Viharotsav ) Part 3 By Shree Hita Ambrish ji

Shri Hit Vrindavan Bhav Utsav ( Van Viharotsav ) Part 4 By Shree Hita Ambrish ji

Shri Hit Vrindavan Bhav Utsav ( Van Viharotsav ) Part 5 By Shree Hita Ambrish ji

Shri Hit Vrindavan Bhav Utsav ( Van Viharotsav ) Part 6 By Shree Hita Ambrish ji

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जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा
मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।