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Srimad Bhagavad Gita - Yatharth Geeta (Hindi)

Contents of this list:

Prakkathan (Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta)
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 001 CHAPTER 1-A
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 003 CHAPTER 2-A
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 002 CHAPTER 1-B
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 004 CHAPTER 2-B
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 005 CHAPTER 3
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 006 CHAPTER 4-A
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 007 CHAPTER 4-B
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 008 CHAPTER 5
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 009 CHAPTER 6
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 010 CHAPTER 7
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 011 CHAPTER 8
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 012 CHAPTER 9
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 013 CHAPTER 10
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 014 CHAPTER 11
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 015 CHAPTER 12
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 016 CHAPTER 13
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 017 CHAPTER 14
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 018 CHAPTER 15
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 019 CHAPTER 16
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 020 CHAPTER 17
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 021 CHAPTER A
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 022 CHAPTER B
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 023 UPSHAM 1
Shreemad Bhagwad Geeta - Yatharth Geeta - 024 UPSHAM 2

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ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे
किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।