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Bhagavad gita

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 1 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 2 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 3 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 4 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 5 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 6 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 7 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 8 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 9 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 10 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 11 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 12 of 13

Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 13 of 13

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Sugi Sivam Essence of Bhagavath Geetha Tamil 5 of 13
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ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
दीवानी बन जाउंगी मस्तानी बन जाउंगी,
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है