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50+ Bhagwad Gita lectures by Sukhbodhananda ji

Living Consciously - Handling Inner Conflict (Bhagavad Gita Vol. 1 & 2)

Changing the Invisible Self (Bhagavad Gita Vol. 3 & 4)

Happy, Here & Now (Bhagavad Gita - Vol. 5 & 6)

Being Open & Centered - (Bhagavad Gita - Vol. 7 & 8)

EGO - Edging God Out (Bhagavad Gita - Vol. 9 & 10)

Surging Joy - Within (Bhagavad Gita - Vol. 11 & 12)

Joy in Detachment & Wonderment (Bhagavad Gita - Vol. 13 & 14)

Three Realities - (Bhagavad Gita - Vol. 15 & 16)

Live Life Totally - (Bhagavad Gita - Vol. 17 & )

Integration of Roles - (Bhagavad Gita - Vol. 19 & 20)

The Presence of the Present - (Bhagavad Gita - Vol. 21 & 22)

Attitude towards Action - (Bhagavad Gita - Vol. 23 & 24)

Detachment in Actions (Bhagavad Gita Vol. 25 & 26)

GGY 27 & 28 - Experiencing the Experience

Unessential to Essential - (Bhagavad Gita - Vol. 29 & 30)

Witnessing Consciousness - (Bhagavad Gita - Vol. 31 & 32)

Inner Alchemy - (Bhagavad Gita - Vol. 33 & 34)

GGY 35 & 36 - Transforming Mechanical Centres to Magnetic Centres

GGY 37 & 38 - Inner Strength... Silence

GGY 39 & 40 - Evolving Consciousness Beyond Breakthroughs & Breakdowns

Power of Will (Bhagavad Gita Vol.41 & 42)

Ultimate Devotaion (Bhagavad Gita Vol. 43 & 44)

Opening Up of Excellence - (Bhagavad Gita - Vol. 45 & 46)

Then Mind...The Movement - GGY Vol. 47 & 48 .MPG

Search for Self - (Bhagavad Gita - Vol. 49 & 50)

Growth Oriented Living - (Bhagavad Gita - Vol. 51 & 52)

Divine Flow Within - (Bhagavad Gita - Vol. 53 & 54)

Purity of Being - (Bhagavad Gita - Vol. 55 & 56)

Personal Excellence through Bhagavad Gita

SWAMI SUKHABODHANANDA

Inner Awakening

Let TRUST rule over DOUBTS : Swami Sukhabodhananda @ AdAsia 2011

04 Discouragement to Encouragement

02 JOKES TO JOY

06 A BALANCED MAN

07 SEEDS OF WISDOM

LOOKING AT LIFE DIFFERENTLY

05 WORRY TO WISDOM

03 SUFFERING TO SURRENDER

QCI

Infosys - Hyd - 2006

GOT 2

TERI

Managing LIFE Creatively

Swamiji's Interview in Hindi - Part 2

SWAMI SUKHABODHANANDA - GITA TALKS HYD NOV 2011

e4m AdAsia 2011: Full Video: Global Ethos : Managing Unpredictability in Life & Business Part 3

SWAMI SUKHABODHANANDA'S MANAGING LIFE CREATIVELY WORKSHOP

Swami Sukhabodhananda

Swami Sukhabodhananda - New Living with Values of Health, Prosperity and Happiness

CNN

Aaj Savere - Interview on DD National

Hindi - Dainik Bhaskar - Aurangabad Part 2

Swamiji's Interview in Hindi at Nirguna Mandir - Part 2.MPG

Swamiji's Interview in Hindi at Nirguna Mandir - Part 1.MPG

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Bhagwad Gita lectures by Sukhbodhananda ji

Bhajan Lyrics View All

श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही