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तेरा जनम मरण मिट जाए,
तू हरी का नाम सुमिर प्यारे ।

तेरा जनम मरण मिट जाए,
तू हरी का नाम सुमिर प्यारे ।

बालापन में मन खेलन में, सुख दुःख नहीं था रे,
जोबन रसिया कामन बसिया तन मन धन हारे ।
तू हरी का नाम सुमिर प्यारे...

बूढा हो कर घर में सो कर, सुने वचन खारे,
दुर्बल काया रोग सताया, तृष्णा तन जारे ।
तू हरी का नाम सुमिर प्यारे...

प्रभु नहीं सुमिरा बीता उमरा, काल आए मारे
‘ब्रह्मानंद’ बिना जगदीश्वर कौन विपत टारे



tera janam maran mit jaye tu hari ka naam sumir pyare



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कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
दीवानी बन जाउंगी मस्तानी बन जाउंगी,
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
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यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा
मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
दुनिया का बन कर देख लिया, श्यामा का बन
राधा नाम में कितनी शक्ति है, इस राह पर
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
तुम रूठे रहो मोहन,
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अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की