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राधा रमण सरकार, तूने कैसा जादू फेरा,
मेरा दिल रहा ना मेरा, हो गया तुमसे प्यार

राधा रमण सरकार, तूने कैसा जादू फेरा,
मेरा दिल रहा ना मेरा, हो गया तुमसे प्यार

मेरे राधा रमण सरकार, हो गया तुमसे प्यार

चाँद सा सलोना एक चेहरा,
दिल में उतर गया गहरा ।
बरबस ही दिल लूट के ले गया,
लाख बिठाया मैंने पहरा,
लागे तोरे संग नैना, जागूँ सारी सारी रैना
जीना हुआ है दुशवार, सरकार...

नटवर भेष बना के,
टेडी सी पाग सजा के ।
कदम्भ की छैया नीचे
नाचत मुरली बजाके ।
मधुर अमधुर डोले, कानो में रास घोले
पायल की मीठी झंकार, सरकार...

चाहे साँझ चाओ हो सवेरा,
मुख में सदा हो नाम तेरा ।
करुणा करके दीजिए मोहे,
चरणन माहि बसेरा ।
राधिका रमण गाऊं, जहा जाऊं तुम्हे पाऊँ
कीजिए यही उपकार, सरकार...

मेरे राधा रमण सरकार



radha raman sarkar tune kaisa jadu fera mera dil raha na mera ho gaya tumse pyar



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मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा
मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला