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प्रभु हम पे कृपा करना,
प्रभु हम पे दया करना ।

प्रभु हम पे कृपा करना,
प्रभु हम पे दया करना ।
बैकुंठ तो यही है, हृदय में रहा करना ॥

गूंजेगे राग बन कर वीणा की तार बनके,
प्रगटोगे नाथ मेरे ह्रदय में प्यार बनके ।
हर रागिनी की धुन पर स्वर बन कर उठा करना,
बैकुंठ तो यही है, हृदय में रहा करना ॥

नाचेंगे मोर बनकर हे श्याम तेरे द्वारे,
घनश्याम छाए रहना बनकर के मेघ कारे ।
अमृत की धार बनकर प्यासों पे दया करना,
बैकुंठ तो यही है, हृदय में रहा करना ॥

तेरे वियोग में हम, दिन रात हैं उदासी,
अपनी शरण में लेलो हे नाथ ब्रज के वासी ।
तुम सो हम शब्द बन कर प्राणों में रमा करना,



prabhu hum pe kripa karna prabhu hum pe daya karna



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राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
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बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
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जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
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कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
तेरे दर की भीख से है,
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लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
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मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
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सादर भारत शीश धरी लीन्ही
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मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है