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मन मैला और तन को धोए,
फूल को चाहे,कांटे बोये...कांटे बोये ।

मन मैला और तन को धोए,
फूल को चाहे,कांटे बोये...कांटे बोये ।
मन मैला और तन को धोए...

करे दिखावा भगति का क्यों उजली ओढ़े चादरिया ।
भीतर से मन साफ किया ना, बाहर मांजे गागरिया ।
परमेश्वर नित द्वार पे आया, तू भोला रहा सोए ॥
मन मैला और तन को धोए...

कभी ना मन-मंदिर में तूने प्रेम की ज्योत जगाई ।
सुख पाने तू दर-दर भटके, जनम हुआ दुखदायी ।
अब भी नाम सुमिर ले हरी का, जनम वृथा क्यों खोए ॥
मन मैला और तन को धोए...

साँसों का अनमोल खजाना दिन-दिन लूटता जाए ।
मोती लेने आया तट पे, सीप से मन बहलाए ।
साँचा सुख तो वो ही पाए, शरण प्रभु की होए ॥



man maila aur tan ko dhoye fool ko chahe kaante boye by hari om sharan



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किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
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कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
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वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
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कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
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तेरे दर पे सर झुकाना
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
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