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मैंने सारे किए उपाय
मेरे घर न आए श्याम

मैंने सारे किए उपाय
मेरे घर न आए श्याम
कोई ऐसा जतन बताये
मेरे घर आ जाए श्याम

कोई कहे माखन मिसरी खाता
कोई कहे मेवा चूरमा भाता
मैंने छप्पन भोग लगाए
मेरे घर ना आए श्याम

कोई कहे ये शौक़ीन है भारी
मीठी खुशबु लगती है प्यारी
आँगन में फूल सजाये
मेरे घर ना जाए श्याम

बोले साधू संत और जोगी
जप तप पूजा करनी होगी
जप तप यज्ञ बड़े करवाये
मेरे घर न आए श्याम

सोनू ने फिर युक्ति सुझाई
जिसके वश हैं कृष्ण कन्हाई
तू राधे रटन लगा ले
तेरे घर आ जाए श्याम
तू ले राधे को नाम



maine saare kiye upaaye mere ghar na aaye shyam



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हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे
किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
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राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
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ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
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राधे राधे गाने को जी चाहता है,
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
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उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
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तेरे दर पे सर झुकाना
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।