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मैं बरसाने की छोरी, ना कर मोते बरजोरी
तू कारो और मैं गोरी, अपनों मेल नहीं

मैं बरसाने की छोरी, ना कर मोते बरजोरी
तू कारो और मैं गोरी, अपनों मेल नहीं
मैं तोसे बांधू प्रीत की डोरी, करता नहीं

शुक्र कारो की पड़े नहीं यशोदा मैया के डंडे
एक डांट में है जाते अरमान तुम्हारे ठन्डे
मैं नन्द बाबा का लाला मैं तो ना डरने वाला
तेरा पड़ा हैं मोसे पाला करता खेल नहीं
मैं गुजरी तू गवाला, अपनों मेल नहीं
मैं बरसाने की छोरी...

जहाँ जहाँ मैं जाती हूँ क्यों पीछे पीछे आए
तेरो मेरो मेल नहीं, यह कौन तुम्हे समझाए
तू मुझको ना पहचानी, पिया घाट घाट का पानी
मैं दरिया हूँ तूफानी करता खेल नहीं
अरे ना कर मोसू छैतानी, अपनों मेल नहीं
मैं बरसाने की छोरी...

ऐसी वैसी नार नहीं क्यों मोपे डोरे डाले
बीच डगर में छोड़ सतानो, ओ गोकुल के ग्वाले
मेरा रोज का आना जाना, नरसी का माखन खाना
‘शर्मा’ है श्याम दीवाना करता खेल नहीं
अरे तू गोकुल मैं बरसानो, अपनों मेल नहीं



main barsane ki chori na kar mote barjori tu karo aur main gori apno mel nahi



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राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
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मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
सारी दुनियां है दीवानी, राधा रानी आप
कौन है, जिस पर नहीं है, मेहरबानी आप की
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे