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लिखन वालिया तू हो के दयाल लिखदे
मेरी तख्ती उत्ते राम ते गोपाल लिखदे

लिखन वालिया तू हो के दयाल लिखदे
मेरी तख्ती उत्ते राम ते गोपाल लिखदे

गणपति वी लिखदे भोला वी लिखदे
गौरा माँ दा पूरा पूरा हाल लिखदे
मेरी तख्ती उत्ते राम ते गोपाल लिखदे

राम वी लिखदे लक्ष्मण वी लिखदे
सीता माँ दा पूरा पूरा हाल लिखदे
मेरी तख्ती उत्ते राम ते गोपाल लिखदे

कृष्णा वी लिखदे दाऊ वी लिखदे
राधा माँ दा पूरा पूरा हाल लिखदे
मेरी तख्ती उत्ते राम ते गोपाल लिखदे

ब्रह्मा वी लिखदे विष्णु वी लिखदे
सरस्वती माँ दा पूरा पूरा हाल लिखदे



likhan waleaa tu ho ke nihal likhde



Bhajan Lyrics View All

हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है