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कोई तो मेरे घनश्याम से कहदे
अरे वो मथुरा ना जाए, वो वापस लौट के आए

कोई तो मेरे घनश्याम से कहदे
अरे वो मथुरा ना जाए, वो वापस लौट के आए

रो रो कहती बृज की नारी, ना जाओ बनवारी
तुम बिन हमरी कौन सुनेगा, सावरिया गिरिधारी
कोई तो मेरे घनश्याम से कहदे...

तुम तो हमको छोड़ चले हो, बोलो हम कहाँ जाएं
दर्शन की यह प्यासी अँखियाँ रो रो नीर बहाए
कोई तो मेरे घनश्याम से कहदे...

यह जीना भी क्या जीना है, तुम बिन मेरे मोहन
सूना सूना मधुबन लागे, सूना हो गया जीवन,
कोई तो मेरे घनश्याम से कहदे...

तुम्हे तो आदत हो गयी है, हमको तड़पाने की
हमे भी आदत हो गयी है, हस कर सह जाने की
कोई तो मेरे घनश्याम से कहदे...

मनमोहन चित्त सांवरे प्रेम नगर के राजा
बांकी अदा से हस कर पकड़ो, पकड़ो हाथ हमारा
कोई तो मेरे घनश्याम से कहदे...

जब से श्याम तुम दूर गए हो, भूल गया जग सारा
मैं तो तुम को भाऊ ना भाऊ, तू तो भा गया मुझको



koi to mere ghanshyam se keh de are vo mathura na jaye vapis laut ke aaye



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राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
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एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
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बजाओ राधा नाम की ताली ।
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कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
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कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
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मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा