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राधा आई, सखिया आयीं, लेकर रंग गुलाल
 काले रे काले कहना ने कैसो कर दियो लाल

राधा आई, सखिया आयीं, लेकर रंग गुलाल
 काले रे काले कहना ने कैसो कर दियो लाल

 जुलम कर डारो सितम कर डारो,
 कारे ने कर दियो लाल, जुलम कर डारो!

अरे नज़र मोहन मतवारो, राधा जी करे इशारो!
 रे नैना सुं करो कमाल, जुलम कर डारो!

सब घेर लियो ब्रज नारी, नखरारी गामन वारी!
 के चली गजब की चाल, जुलम कर डारो!

काजल की डिबिया लायी अंगिया साडी पहनाई,
 मुखडे पे मलो गुलाल, जुलम कर डारो!

लियो पकड़ बिहारी कसके, रंग दियो खुब हँस हँस के!
 बोली फ़िर आइयो नंदलाल, जुलम कर डारो!

सम्पर्क:- प्रियदर्शन
राधा कृष्ण मंडल ब्रजपुरी



julam kar daro sitam kar daro kale ne kar diyo laal julam kar daro



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यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
दुनिया का बन कर देख लिया, श्यामा का बन
राधा नाम में कितनी शक्ति है, इस राह पर
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे