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जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा,

वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा ।

जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा,
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा ।
जहाँ सत्य अहिंसा और धरम का पग पग लगता डेरा,
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा ॥

जय भारती जय भारती

यह धरती वो जहाँ ऋषि मुनि जपते हरी नाम की माला ।
हरी ओम, हरो ओम, हरो ओम, हरी ओम
जहाँ हर बालक इक मोहन है, और राधा इक इक बाला ।
जहा सूरज सब से पहले आकर डाले अपना फेरा,
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा ॥

जहाँ गंगा यमुना कृष्णा और कावेरी बहती जाये ।
जहां उत्तर दक्षिण पूर्व पछिम को अमृत पिलवाये ।
कहीं यह जल फल और फूल उगाये केसर कहीं बिखेरा,
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा ॥

अलबेलों की इस धरती के त्यौहार भी हैं अलबेले ।
कहीं दिवाली की जगमग है होली के कहीं मेले ।
जहाँ राग रंग और हसी ख़ुशी का चारो और है घेरा,
वो भारत देश है मेरा, वो भारत देश है मेरा ॥

जहां आसमान से बाते करते मंदिर और शिवालये ।
किसी नगर में किसी द्वार पर कोई ना ताला डाले ।
और प्रेम की बंसी जहाँ बजाता आए श्याम सवेरा,



jahan daal daal par sone ki chidiya karti hai basera



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बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा
मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को