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हम पागल हैं पागल वृन्दावन धाम के
वृन्दावन धाम के, श्री श्यामा शाम के

हम पागल हैं पागल वृन्दावन धाम के
वृन्दावन धाम के, श्री श्यामा शाम के

डोले श्याम नाम के पागल, वृन्दावन पागल खाने में
मस्ती में मस्त हैं रहते, मिले पागलपन नज़राने में
मन तू भी पागल हो जा, मस्ताने तरंग में खो जा
चढ़ जाए ना साफिर नाम के जाम में,
हम पागल हैं पागल वृन्दावन धाम के

पूरे मन से जो लग जाता, वो लग कर कुछ पा लेता है
सदा अंग संग हरी रहता पर ध्यान ना कोई देता है
कोई झूठे नाम के पागल, कोई सच्चे श्याम के पागल,
जहा दूर दूर तक पागल जगत तमाम में,
हम पागल हैं पागल वृन्दावन धाम के

कितने हुए अब तक पागल इन की न कोई समायी
मीरा करमा विधुरानी शबरी गोपाली बाई
पावन भक्तो के चरित्र हृदय को करे पवित्र
पागल करे ‘चित्र विचत्र’ श्री राधा नाम के



hum pagal hain pagal vrindava dhaam ke sree shyama shyam ke



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हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥