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हरि का भजन करो हरि है तुम्हारा
हरि के भजन बिन, नहीं गुजारा

हरि का भजन करो हरि है तुम्हारा
हरि के भजन बिन, नहीं गुजारा

हरि नाम से तेरा काम बनेगा
हरि नाम ही तेरे साथ चलेगा
हरि नाम लेने वाला,
हरि का है प्यारा

कोई काहे राधेश्याम, कोई काहे सीताराम
कोई गिरिधर गोपाल, कोई राधामाधव लाल
वोही हरि दीन बंधू, वोही करी करुना सिन्धु, नमो बारम्बारा

सुख़ दुःख भोगे जाओ, लेखा सब मिटाते जाओ
हरि गुण जाओ, हरि को रिझाते जाओ
वोही हरि दीन बंधू, वोही करी करुना सिन्धु, सब का है प्यारा

दीनो पर दया करो, बने तो सेवा भी करो
मोह सब दूर करो, प्रेम हरि ही से करो



Hari Ka Bhajan Karo Hari Hai Tumhara



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दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा
मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
दुनिया का बन कर देख लिया, श्यामा का बन
राधा नाम में कितनी शक्ति है, इस राह पर
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
सारी दुनियां है दीवानी, राधा रानी आप
कौन है, जिस पर नहीं है, मेहरबानी आप की
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे