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देखते रह जाओगे देखते रह जाओगे
आओगे कुटिया में मेरी कुटिया में ही रह जाओगे

देखते रह जाओगे देखते रह जाओगे
आओगे कुटिया में मेरी कुटिया में ही रह जाओगे

श्याम तेरा मंदिर संगमरमर का
की घर मेरा है सस्ते पत्थर का
हर पत्थर में प्यार समाया कहाँ पे दिल को लगाओगे
देखते रह जाओगे देखते रह जाओगे

श्याम तेरा लकड़ी का दरवाजा
हमारे घर है दिल का दरवाज़ा
उससे निकल जाओगे लेकिन इससे निकल नहीं पाओगे
देखते रह जाओगे देखते रह जाओगे

श्याम तेरा चांदी का सिंघासन
यहाँ पे मेरी पलकों का है आसन
इक चाँदी का इक नयनों का कहाँ पे डेरा जमाओगे
देखते रह जाओगे देखते रह जाओगे

श्याम तेरा गाँव का पानी खारा
यहाँ पे बनवारी असुंवन  धारा
एक कुवें का एक अखियन का किससे चरण धुलवाओगे



dekhte reh jaoge dekhte reh jaaoge aaoge kutiya me meri kutiya me hi reh jaoge



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ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
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जग कहता खेल नसीबों का
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं