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चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो,
ऊँची अटारी वारी प्यारी की जय हो ।

चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो,
ऊँची अटारी वारी प्यारी की जय हो ।

रे मन मूरख चिंता न कर जप ले राधा राधा,
कोटि जनम की विपदा काटे राधा नाम यह आधा ।
हरी प्रकट हो ऐसी नाम खुमारी की जय हो,
चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो ॥

जप तप सयम ना जानू, ना जानू कोई पूजा,
एक भरोसा श्री कुंवारी को, नाही कोई दूजा ।
शुक नारद भी गाये महिमा नयारी की जय हो,
चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो ॥

जिनकी कृपा से वृन्दावन में मोहन मुरली बजाई,
टेड़े कदम के आगे खाडे, मुरली मधुर बजाई ।
ऐसो रस बरसाने वारी की जय हो,
चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो ॥

'हरी दासी’ सब छोड़ झमेले, बरसाने चली आना,
संतो के चरणो में जा के सांचो भाव जगाना ।
कोटि चद्र रूप उज्जयारी की जय हो,
चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो ॥


राधा रानी की जय, राधा रानी की जय
बोलो रस बरसाने वारी की जय
बोलो ऊँची अटारी वारी प्यारी की जय



chinta ho na bhay ho radha rani ki jay ho



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अपनी वाणी में अमृत घोल
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