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दोहा :
भकत बड़े बलवान तुम्ही हो, सालासर हनुमान तुम्ही हो ।

दोहा :
भकत बड़े बलवान तुम्ही हो, सालासर हनुमान तुम्ही हो ।
आया हूँ मैं दर पे, तुझको आज पुकारा ।
पावो में घुंघरू बाँध के नाचे, मेरा बजरंग प्यारा ॥

छम छम नाचे देखो वीर हनुमना ।
कहेते है लोग इसे राम का दीवाना ॥

पाँवो मे घुंगूरू बाँध के नाचे ,
रामजी का नाम इन्हे बड़ा प्यारा लागे ।
राम ने भी देखो इसे खूब पहचाना,
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना ॥

जहाँ जहाँ कीर्तन होता श्री राम का,
लगता है पहेरा वहाँ वीर हनुमान का ।
राम के चरण मे है इनका टिकना,
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना ॥

नाच नाच प्रभु श्री राम को रिझवे,
‘बनवारी’ रात दिन नाचता ही जाए ।
भक्तो मे भक्त बड़ा, दुनिया ने माना,



cham cham nache dekho veer hanumana



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वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥