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भज गोविन्द गोविन्द गोपाला
भज मुरली मनोहर नन्द लाला

भज गोविन्द गोविन्द गोपाला
भज मुरली मनोहर नन्द लाला
प्यारे मुकुंद माधव गोविन्द बोल
हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी बोल

हरे रामा रामा राम, सीता राम राम राम
सीता राम राम राम, राधे श्याम श्याम श्याम
भज गोविन्द गोविन्द गोपाला
भज मुरली मनोहर नन्द लाला

राम धुन लागि रे गोपाल धुन लागि
लागि रे मोहे राधे धुन लागि
भज गोविन्द गोविन्द गोपाला
भज मुरली मनोहर नन्द लाला

भज गोविन्द गोविन्द गोपाला
भज मुरली मनोहर नन्द लाला
प्यारे मुकुंद माधव गोविन्द बोल
हरी बोल हरी बोल हरी बोल हरी बोल

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bhaj govind govind gopala



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मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा
मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा