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ਬਾਰੀ ਬਰਸੀ ਖਟਨ ਗਿਆ ਸੀ, ਖਟ ਕੇ ਲਿਆਂਦਾ ਧੇਲਾ
ਚੇਤ ਮਹੀਨੇ ਲਗਿਆ ਹੈ ਬਾਬੇ ਦੇ ਦਰ ਤੇ ਮੇਲਾ

ਬਾਰੀ ਬਰਸੀ ਖਟਨ ਗਿਆ ਸੀ, ਖਟ ਕੇ ਲਿਆਂਦਾ ਧੇਲਾ
ਚੇਤ ਮਹੀਨੇ ਲਗਿਆ ਹੈ ਬਾਬੇ ਦੇ ਦਰ ਤੇ ਮੇਲਾ
ਬੱਲੇ ਬੱਲੇ ਹੋ ਗਈ ਏ, ਕੇ ਬੈਜਾ ਬੈਜਾ ਹੋ ਗਈ ਏ

ਸੰਗ ਸ਼ਾਹਤਲਾਈਆ ਜਾਂਦੇ ਤੇ ਉਚੀ ਜੈਕਾਰੇ ਲਾਂਦੇ
ਜਦ ਡਗਾ ਢੋਲ ਤੇ ਵਜਦਾ ਤੇ ਰਲਮਿਲ ਭੰਗੜੇ ਪਾਉਂਦੇ
ਭਗਤਾਂ ਨੇ ਬਾਬਾ ਜੀ ਦੇ ਦਰ ਮਲ ਲਏ,
ਮਾਲ ਲਏ ਦਰ ਮਲ ਲਏ ਮਲ ਲਏ

ਬਾਰੀ ਬਰਸੀ ਖਟਨ ਗਿਆ ਸੀ, ਖਟ ਕੇ ਲਿਆਂਦੇ ਛੈਣੇ
ਬਾਬੇ ਪਰਉਪਕਾਰ ਜੋ ਕੀਤੇ ਕੇਆ ਬਾਤਾਂ ਕੇਆ ਕਹਨੇ
ਬੱਲੇ ਬੱਲੇ ਹੋ ਗਈ ਏ, ਕੇ ਬੈਜਾ ਬੈਜਾ ਹੋ ਗਈ ਏ


ਕਈ ਕੈਂਦੇ ਦੁਧਾਧਾਰੀ ਕਈ ਆਖਣ ਪੌਣਾਹਾਰੀ
ਗਾ ਔਨ੍ਸਰ ਦਾ ਦੁੱਦ ਚੋ ਕੇ ਲਾਵੇ ਮੋਰ ਜੇ ਜਦੋ ਉਡਾਰੀ
ਮਨ ਗਏ ਬਾਬਾ ਜੀ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਨੂੰ,
ਮਨ ਗਏ ਸ਼ਕਤੀ ਨੂੰ ਮਨ ਗਏ

ਜੋਸ਼ੀਲੇ ਭਗਤ ਨੇ ਰੋਟ ਚੜਾਉਂਦੇ ਪੂਰੀਆ ਰੀਜਾ ਲਾਕੇ
ਹੁੰਦੀਆ ਪੂਰਿਆ ਆਸਾਂ ਨੇ ਜਦ ਚਲ ਕੇ ਜਾਣ ਚੜਾ ਕੇ



bbari barsi khatan geya si



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अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
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राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
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वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
वृदावन जाने को जी चाहता है,
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तू राधे राधे गा ,
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मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
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