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ਮੇਲਾ ਮੇਲਾ ਮੇਲਾ ਬਾਬਾ ਬਾਲਕ ਨਾਥ ਦਾ ਮੇਲਾ
ਭਗਤਾਂ ਦਾ ਰਖਵਾਲਾ ਬਾਬਾ ਮਸਤ ਮਲੰਗ ਅਲਬੇਲਾ

ਮੇਲਾ ਮੇਲਾ ਮੇਲਾ ਬਾਬਾ ਬਾਲਕ ਨਾਥ ਦਾ ਮੇਲਾ
ਭਗਤਾਂ ਦਾ ਰਖਵਾਲਾ ਬਾਬਾ ਮਸਤ ਮਲੰਗ ਅਲਬੇਲਾ

ਮੇਲਾ ਦੇਖਣ ਸ਼ਿਵਜੀ ਆਏ
ਪਾਰਵਤੀ ਨੂ ਸੰਗ ਲੇਆਏ
ਨੰਦੀ ਬਣ ਗਿਆ ਚੇਲਾ

ਮੇਲਾ ਦੇਖਣ ਵਿਸ਼੍ਣੁ ਆਏ
ਲਕਸ਼ਮੀ ਮਾਂ ਨੂੰ ਨਾਲ ਲੇਆਏ
ਨਾਰਦ ਬਣ ਗਿਆ ਚੇਲਾ

ਮੇਲਾ ਦੇਖਣ ਰਾਮ ਜੀ ਆਏ
ਸੀਤਾ ਜੀ ਨੂੰ ਨਾਲ ਲੇਆਏ
ਬਜਰੰਗੀ ਬਣ ਗਿਆ ਚੇਲਾ

ਮੇਲਾ ਦੇਖਣ ਬ੍ਰਹਮਾ ਜੀ ਆਏ
ਸਰਸ੍ਵਤੀ ਨੂੰ ਨਾਲ ਲੇਆਏ



baaba baalak nath da mela



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तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया,
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया।
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
लाली की सुनके मैं आयी
कीरत मैया दे दे बधाई
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे ,बलिहार
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,