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Ram Katha [Manas Karuna Nidhaan] by Morari Bapu Ji at Shillong, Meghalya in September 2015

Ram Katha Morari Bapu 762 Manas KarunaNidhaan Day 1 Shilong September 2015

Ram Katha Morari Bapu 762 Manas KarunaNidhaan Day 2 Shilong September 2015

Ram Katha Morari Bapu 762 Manas KarunaNidhaan Day 3 Shilong September 2015

Ram Katha Morari Bapu 762 Manas KarunaNidhaan Day 4 Shilong September 2015

Ram Katha Morari Bapu 762 Manas KarunaNidhaan Day 5 Shilong September 2015

Ram Katha Morari Bapu 762 Manas KarunaNidhaan Day 6 Shilong September 2015

Ram Katha Morari Bapu 762 Manas KarunaNidhaan Day 7 Shilong September 2015

Ram Katha Morari Bapu 762 Manas KarunaNidhaan Day 8 Shilong September 2015

Ram Katha Morari Bapu 762 Manas KarunaNidhaan Day 9 Shilong September 2015

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बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
सारी दुनियां है दीवानी, राधा रानी आप
कौन है, जिस पर नहीं है, मेहरबानी आप की
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे
किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
मेरा आपकी कृपा से,
सब काम हो रहा है
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया