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Ram Katha [Manas Godavari, ALL 9 Days Full] by Morari Bapu Ji at Nasik in September 2015

Ram Katha Morari Bapu 761 Manas Godavari Day 1 Nasik September 2015

Ram Katha Morari Bapu 761 Manas Godavari Day 2 Nasik September 2015

Ram Katha Morari Bapu 761 Manas Godavari Day 3 Nasik September 2015

Ram Katha Morari Bapu 761 Manas Godavari Day 4 Nasik September 2015

Ram Katha Morari Bapu 761 Manas Godavari Day 5 Nasik September 2015

Ram Katha Morari Bapu 761 Manas Godavari Day 6 Nasik September 2015

Ram Katha Morari Bapu 761 Manas Godavari Day 7 Nasik September 2015

Ram Katha Morari Bapu 761 Manas Godavari Day 8 Nasik September 2015

Ram Katha Morari Bapu 761 Manas Godavari Day 9 Nasik September 2015

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एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
मेरी करुणामयी सरकार पता नहीं क्या दे
क्या दे दे भई, क्या दे दे
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
हम राम जी के, राम जी हमारे हैं
वो तो दशरथ राज दुलारे हैं
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से