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Swami Rajendra Das Ji Maharaj

Parvachan Mala - Maluk Pithadhishvar Swami Shri Rajendra Das Ji Maharaj

Maluk Pithadhishvar Swami Shri Rajendra Das Ji Maharaj - Parvachan Mala

Bhaktmal Katha (Ayodya) Maluk Pithadhishvar Swami Shri Rajendra Das Ji Maharaj - Parvachan Mala

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Parvachan Mala - Maluk Pithadhishvar Swami Shri Rajendra Das Ji Maharaj
Maluk Pithadhishvar Swami Shri Rajendra Das Ji Maharaj - Parvachan Mala
Bhaktmal Katha (Ayodya) Maluk Pithadhishvar Swami Shri Rajendra Das Ji Maharaj - Parvachan Mala

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वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
कान्हा की दीवानी बन जाउंगी,
दीवानी बन जाउंगी मस्तानी बन जाउंगी,
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
आँखों को इंतज़ार है सरकार आपका
ना जाने होगा कब हमें दीदार आपका
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना।
ऐ उधो हमे ज्ञान की पोथी ना सुनाना॥
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
कोई पकड़ के मेरा हाथ रे,
मोहे वृन्दावन पहुंच देओ ।
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने