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Shrimad Bhagwat Katha by Shri Chinmayanand Bapu - Datia

Contents of this list:

Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 01
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 02
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 03
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 04
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 05
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 06
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 07
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 08
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 09
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 10
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 11
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 12
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 13
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 14
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 15
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 16
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 17
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 19
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 20
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 21
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 22
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 23
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 32
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 24
Shrimad Bhagwat Katha, Chinmayanand Bapu 25

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हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया ।
राम एक देवता, पुजारी सारी दुनिया ॥
हर पल तेरे साथ मैं रहता हूँ,
डरने की क्या बात? जब मैं बैठा हूँ
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
सांवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी
यह तो जाने दुनिया सारी है
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
दुनिया से मैं हारा तो आया तेरे द्वार,
यहाँ से गर जो हरा कहाँ जाऊँगा सरकार
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
राधा नाम की लगाई फुलवारी, के पत्ता
के पत्ता पत्ता श्याम बोलता, के पत्ता
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की