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Shrimad Bhagwat in marathi

Bhagawat-katha-01-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-02-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-03-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-04-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-05-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-06-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-07-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-08-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-09-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-10-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-11-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-12-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-13-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-14-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-15-by-Shri-Vishvesh-Bodas

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Bhagawat-katha-17-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha--by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-19-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-20-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-21-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-22-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-23-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-24-by-Shri-Vishvesh-Bodas

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Bhagawat-katha-01-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-02-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-03-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-04-by-Shri-Vishvesh-Bodas
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Bhagawat-katha-22-by-Shri-Vishvesh-Bodas
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कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
सांवरिया है सेठ ,मेरी राधा जी सेठानी
यह तो सारी दुनिया जाने है
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से ,
मैया करादे मेरो ब्याह,
राधे राधे बोल, राधे राधे बोल,
बरसाने मे दोल, के मुख से राधे राधे बोल,
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
सारी दुनियां है दीवानी, राधा रानी आप
कौन है, जिस पर नहीं है, मेहरबानी आप की
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
मन चल वृंदावन धाम, रटेंगे राधे राधे
मिलेंगे कुंज बिहारी, ओढ़ के कांबल
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।
जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥