Share this page on following platforms.

Home Katha Bhagwat Katha

Shrimad Bhagwat in marathi

Bhagawat-katha-01-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-02-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-03-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-04-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-05-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-06-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-07-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-08-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-09-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-10-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-11-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-12-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-13-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-14-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-15-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-16-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-17-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha--by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-19-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-20-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-21-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-22-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-23-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhagawat-katha-24-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Contents of this list:

Bhagawat-katha-01-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-02-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-03-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-04-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-05-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-06-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-07-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-08-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-09-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-10-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-11-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-12-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-13-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-14-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-15-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-16-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-17-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha--by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-19-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-20-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-21-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-22-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-23-by-Shri-Vishvesh-Bodas
Bhagawat-katha-24-by-Shri-Vishvesh-Bodas

Bhajan Lyrics View All

अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
ये सारे खेल तुम्हारे है
जग कहता खेल नसीबों का
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
तमन्ना यही है के उड के बरसाने आयुं मैं
आके बरसाने में तेरे दिल की हसरतो को
एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
मोहे आन मिलो श्याम, बहुत दिन बीत गए।
बहुत दिन बीत गए, बहुत युग बीत गए ॥
मुझे चाहिए बस सहारा तुम्हारा,
के नैनों में गोविन्द नज़ारा तुम्हार
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा
मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
दुनिया का बन कर देख लिया, श्यामा का बन
राधा नाम में कितनी शक्ति है, इस राह पर
मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे
किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
यह मेरी अर्जी है,
मैं वैसी बन जाऊं जो तेरी मर्ज़ी है
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
श्री राधा हमारी गोरी गोरी, के नवल
यो तो कालो नहीं है मतवारो, जगत उज्य