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Shreemad Bhagwat Katha By Shri Abhishekji Goswami Maharaj in June 2015 at Juhu, Mumbai

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Day 1, Juhu (Mumbai)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Day 2, Juhu (Mumbai)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Day 3, Juhu (Mumbai)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Day 4, Juhu (Mumbai)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Day 5, Juhu (Mumbai)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Day 6, Juhu (Mumbai)

Shreemad Bhagwat Katha - Shri Abhishekji Goswami Maharaj - Day 7, Juhu (Mumbai)

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एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज
पारवती भी मना कर ना माने त्रिपुरारी,
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
बजाओ राधा नाम की ताली ।
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
ये तो बतादो बरसानेवाली,मैं कैसे
तेरी कृपा से है यह जीवन है मेरा,कैसे
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
वृदावन जाने को जी चाहता है,
राधे राधे गाने को जी चाहता है,
जग में सुन्दर है दो नाम, चाहे कृष्ण
बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
साँवरिया ऐसी तान सुना,
ऐसी तान सुना मेरे मोहन, मैं नाचू तू गा
बोल कान्हा बोल गलत काम कैसे हो गया,
बिना शादी के तू राधे श्याम कैसे हो
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
ना मैं मीरा ना मैं राधा,
फिर भी श्याम को पाना है ।
मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
नटवर नागर नंदा, भजो रे मन गोविंदा
शयाम सुंदर मुख चंदा, भजो रे मन
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
कहना कहना आन पड़ी मैं तेरे द्वार ।
मुझे चाकर समझ निहार ॥