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Shreemad Bhagwat Katha By Avdheshanand Giriji Maharaj in January 2015 At Chennai

Shreemad Bhagwat Katha - Avdheshanand Giriji Maharaj (Day - 1) Chennai

Shreemad Bhagwat Katha - Avdheshanand Giriji Maharaj (Day - 2) Chennai

Shreemad Bhagwat Katha - Avdheshanand Giriji Maharaj (Day - 3) Chennai

Shreemad Bhagwat Katha - Avdheshanand Giriji Maharaj (Day - 4) Chennai

Shreemad Bhagwat Katha - Avdheshanand Giriji Maharaj (Day - 5) Chennai

Shreemad Bhagwat Katha - Avdheshanand Giriji Maharaj (Day - 6) Chennai

Shreemad Bhagwat Katha - Avdheshanand Giriji Maharaj (Day - 7) Chennai

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तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
रंगीलो राधावल्लभ लाल, जै जै जै श्री
विहरत संग लाडली बाल, जै जै जै श्री
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
और संग में सज रही है वृषभानु की
वास देदो किशोरी जी बरसाना,
छोडो छोडो जी छोडो जी तरसाना ।
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,
कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥
तुम रूठे रहो मोहन,
हम तुमको मन लेंगे
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
श्याम बुलाये राधा नहीं आये,
आजा मेरी प्यारी राधे बागो में झूला
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
करदो करदो बेडा पार, राधे अलबेली सरकार।
राधे अलबेली सरकार, राधे अलबेली
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
राधा कट दी है गलिआं दे मोड़ आज मेरे
श्याम ने आना घनश्याम ने आना
प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
दुनिया का बन कर देख लिया, श्यामा का बन
राधा नाम में कितनी शक्ति है, इस राह पर
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
तेरे बगैर सांवरिया जिया नही जाये
तुम आके बांह पकड लो तो कोई बात बने‌॥
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये
हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये