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Faridabad (Haryana) Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - (15- Nov14 to 21 Nov 14)

Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 1 (Haryana)

Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 2 (Haryana)

Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 3 (Haryana)

Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 4 (Haryana)

Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 5 (Haryana)

Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 6 (Haryana)

Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 7 (Haryana)

Contents of this list:

Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 1 (Haryana)
Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 2 (Haryana)
Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 3 (Haryana)
Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 4 (Haryana)
Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 5 (Haryana)
Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 6 (Haryana)
Shreemad Bhagwat Katha - Swami Avdeshanand Giriji Maharaj - Day 7 (Haryana)

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नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
कोई कहे गोविंदा कोई गोपाला,
मैं तो कहूँ सांवरिया बांसुरी वाला ।
जय राधे राधे, राधे राधे
जय राधे राधे, राधे राधे
इक तारा वाजदा जी हर दम गोविन्द
जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
लाडली अद्बुत नज़ारा तेरे बरसाने में
लाडली अब मन हमारा तेरे बरसाने में है।
अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है
सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है
हम प्रेम नगर के बंजारिन है
जप ताप और साधन क्या जाने
जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया
जब शमा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
बहुत बड़ा दरबार तेरो बहुत बड़ा दरबार,
चाकर रखलो राधा रानी तेरा बहुत बड़ा
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से
राधे मोरी बंसी कहा खो गयी,
कोई ना बताये और शाम हो गयी,
अपनी वाणी में अमृत घोल
अपनी वाणी में अमृत घोल
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
ज़िंदगी मे हज़ारो का मेला जुड़ा
हंस जब जब उड़ा तब अकेला उड़ा
सारी दुनियां है दीवानी, राधा रानी आप
कौन है, जिस पर नहीं है, मेहरबानी आप की
दिल की हर धड़कन से तेरा नाम निकलता है
तेरे दर्शन को मोहन तेरा दास तरसता है
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
राधा क्यूँ गोरी, मैं क्यूँ काला
बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
हो मेरी लाडो का नाम श्री राधा
श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
श्यामा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल
सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
श्यामा प्यारी मेरे साथ हैं,
फिर डरने की क्या बात है
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोधराम वासुदेवं हरिं,
तेरे दर की भीख से है,
मेरा आज तक गुज़ारा