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Home Gurus Sukhbodhananda

swami sukhbodhananda

06 A BALANCED MAN

05 WORRY TO WISDOM

03 SUFFERING TO SURRENDER

09 HARMONY IN CHAOS

Living Consciously - Handling Inner Conflict (Bhagavad Gita Vol. 1 & 2)

01 GET RID OF STRESS

Detachment in Actions (Bhagavad Gita Vol. 25 & 26)

Unessential to Essential - (Bhagavad Gita - Vol. 29 & 30)

Being Open & Centered - (Bhagavad Gita - Vol. 7 & 8)

EGO - Edging God Out (Bhagavad Gita - Vol. 9 & 10)

07 SEEDS OF WISDOM

02 JOKES TO JOY

GGY 37 & 38 - Inner Strength... Silence

01 GET RID OF STRESS

LOOKING AT LIFE DIFFERENTLY

07 SEEDS OF WISDOM

GGY 37 & 38 - Inner Strength... Silence

Unessential to Essential - (Bhagavad Gita - Vol. 29 & 30)

Living Consciously - Handling Inner Conflict (Bhagavad Gita Vol. 1 & 2)

Surging Joy - Within (Bhagavad Gita - Vol. 11 & 12)

04 Discouragement to Encouragement

EGO - Edging God Out (Bhagavad Gita - Vol. 9 & 10)

Three Realities - (Bhagavad Gita - Vol. 15 & 16)

Surging Joy - Within (Bhagavad Gita - Vol. 11 & 12)

Three Realities - (Bhagavad Gita - Vol. 15 & 16)

Unessential to Essential - (Bhagavad Gita - Vol. 29 & 30)

Power of Will (Bhagavad Gita Vol.41 & 42)

Ultimate Devotaion (Bhagavad Gita Vol. 43 & 44)

Inner Alchemy - (Bhagavad Gita - Vol. 33 & 34)

Attitude towards Action - (Bhagavad Gita - Vol. 23 & 24)

Witnessing Consciousness - (Bhagavad Gita - Vol. 31 & 32)

Three Realities - (Bhagavad Gita - Vol. 15 & 16)

Integration of Roles - (Bhagavad Gita - Vol. 19 & 20)

Integration of Roles - (Bhagavad Gita - Vol. 19 & 20)

Detachment in Actions (Bhagavad Gita Vol. 25 & 26)

Lecture that will change your life Part-1

Unessential to Essential - (Bhagavad Gita - Vol. 29 & 30)

Contents of this list:

06 A BALANCED MAN
05 WORRY TO WISDOM
03 SUFFERING TO SURRENDER
09 HARMONY IN CHAOS
Living Consciously - Handling Inner Conflict (Bhagavad Gita Vol. 1 & 2)
01 GET RID OF STRESS
Detachment in Actions (Bhagavad Gita Vol. 25 & 26)
Unessential to Essential - (Bhagavad Gita - Vol. 29 & 30)
Being Open & Centered - (Bhagavad Gita - Vol. 7 & 8)
EGO - Edging God Out (Bhagavad Gita - Vol. 9 & 10)
07 SEEDS OF WISDOM
02 JOKES TO JOY
GGY 37 & 38 - Inner Strength... Silence
01 GET RID OF STRESS
LOOKING AT LIFE DIFFERENTLY
07 SEEDS OF WISDOM
GGY 37 & 38 - Inner Strength... Silence
Unessential to Essential - (Bhagavad Gita - Vol. 29 & 30)
Living Consciously - Handling Inner Conflict (Bhagavad Gita Vol. 1 & 2)
Surging Joy - Within (Bhagavad Gita - Vol. 11 & 12)
04 Discouragement to Encouragement
EGO - Edging God Out (Bhagavad Gita - Vol. 9 & 10)
Three Realities - (Bhagavad Gita - Vol. 15 & 16)
Surging Joy - Within (Bhagavad Gita - Vol. 11 & 12)
Three Realities - (Bhagavad Gita - Vol. 15 & 16)
Unessential to Essential - (Bhagavad Gita - Vol. 29 & 30)
Power of Will (Bhagavad Gita Vol.41 & 42)
Ultimate Devotaion (Bhagavad Gita Vol. 43 & 44)
Inner Alchemy - (Bhagavad Gita - Vol. 33 & 34)
Attitude towards Action - (Bhagavad Gita - Vol. 23 & 24)
Witnessing Consciousness - (Bhagavad Gita - Vol. 31 & 32)
Three Realities - (Bhagavad Gita - Vol. 15 & 16)
Integration of Roles - (Bhagavad Gita - Vol. 19 & 20)
Integration of Roles - (Bhagavad Gita - Vol. 19 & 20)
Detachment in Actions (Bhagavad Gita Vol. 25 & 26)
Lecture that will change your life Part-1
Unessential to Essential - (Bhagavad Gita - Vol. 29 & 30)

Bhajan Lyrics View All

बृज के नन्द लाला राधा के सांवरिया
सभी दुख: दूर हुए जब तेरा नाम लिया
ज़रा छलके ज़रा छलके वृदावन देखो
ज़रा हटके ज़रा हटके ज़माने से देखो
तू कितनी अच्ची है, तू कितनी भोली है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ ।
मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या
उनसे तो प्यार है हमसे तकरार है ।
बांके बिहारी की देख छटा,
मेरो मन है गयो लटा पटा।
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो
लै गया नन्द किशोर लै गया,
वृन्दावन के बांके बिहारी,
हमसे पर्दा करो ना मुरारी ।
मेरी विनती यही है राधा रानी, कृपा
मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
राधे तु कितनी प्यारी है ॥
तेरे संग में बांके बिहारी कृष्ण
हे राम, हे राम, हे राम, हे राम
जग में साचे तेरो नाम । हे राम...
कैसे जीऊं मैं राधा रानी तेरे बिना
मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
एक कोर कृपा की करदो स्वामिनी श्री
दासी की झोली भर दो लाडली श्री राधे॥
मुझे चढ़ गया राधा रंग रंग, मुझे चढ़
श्री राधा नाम का रंग रंग, श्री राधा
वृंदावन में हुकुम चले बरसाने वाली का,
कान्हा भी दीवाना है श्री श्यामा
हर साँस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बीत जाये जीवन मेरा
तीनो लोकन से न्यारी राधा रानी हमारी।
राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
मेरी रसना से राधा राधा नाम निकले,
हर घडी हर पल, हर घडी हर पल।
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है
वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है
तेरे दर पे आके ज़िन्दगी मेरी
यह तो तेरी नज़र का कमाल है,
दिल लूटके ले गया नी सहेलियो मेरा
मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा
मेरी करुणामयी सरकार, मिला दो ठाकुर से
कृपा करो भानु दुलारी, श्री राधे
हम हाथ उठाकर कह देंगे हम हो गये राधा
राधा राधा राधा राधा
कोई कहे गोविंदा, कोई गोपाला।
मैं तो कहुँ सांवरिया बाँसुरिया वाला॥
प्रभु कर कृपा पावँरी दीन्हि
सादर भारत शीश धरी लीन्ही
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा
श्याम देखा घनश्याम देखा
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं